क्या मंजारा है?

इस कविता के माध्यम से मैंने देश के हालत पर व्यंग किया।दोनों समाज से निवेदन है दिल पर न लें।

कहीं हिन्दू ,मुस्लिम बनने को अरा है।

कहीं मुस्लिम, हिन्दू बनने को खड़ा है।

क्या माजरा है?

कहीं है प्रेम प्रसंग ।

कहीं गद्दी का लफरा है।

क्या माजरा है?

The world of creation. द्वारा प्रकाशित

Student leader ,founder of R.R.P.S Ramnagar and part time poet.

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